उपमुख्यमंत्री अरुण साव का बस्तर दौरा: विश्वास की बुनियाद पर विकास और संवाद की दस्तक

लेखक: आशीष मिश्रा, प्रबंध संपादक

बस्तर में विकास की नई आहट

लंबे समय तक नक्सलवाद, अवसंरचना की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा जैसी चुनौतियों से जूझते रहे बस्तर में अब बदलाव की स्पष्ट खनक सुनाई दे रही है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव का बस्तर संभाग का चार दिवसीय सघन दौरा केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा सकता। यह केंद्र और राज्य सरकार की विकासोन्मुख सोच तथा बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतिक सोच और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव का यह प्रवास उसी परिवर्तन को गति देने का प्रयास दिखाई देता है।

योजनाओं की जमीनी हकीकत पर फोकस

लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, नगरीय प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण तथा विधि-विधायी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे अरुण साव ने अपने दौरे के दौरान विकास कार्यों की प्रगति का स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया।

उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों से योजनाओं की समयबद्ध प्रगति की जानकारी ली तथा जहां विलंब दिखाई दिया, वहां आवश्यक निर्देश और चेतावनी भी दी। उनकी कार्यशैली का विशेष पहलू यह रहा कि उन्होंने कठोर प्रशासनिक संदेश को भी संयमित और सौम्य व्यवहार के साथ प्रस्तुत किया।

गांवों तक पहुंचकर किया संवाद

दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री ने बस्तर जिले के दुगनपाल, कोंडागांव जिले के बेड़मा तथा दंतेवाड़ा जिले के टेकनार जैसे गांवों में पहुंचकर महिलाओं से सीधे संवाद किया। जल जीवन मिशन और जल अर्पण कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया तथा शिकायतें मिलने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगा गया।

यह केवल आंकड़ों की समीक्षा नहीं थी, बल्कि योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को समझने का प्रयास था।

अधोसंरचना परियोजनाओं को मिली गति

अरुण साव ने रायपुर-जगदलपुर राष्ट्रीय मार्ग पर 308 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित केशकाल घाट फोर लेन बायपास परियोजना की समीक्षा की और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में लगभग 69 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे फोर लेन रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण भी किया गया। परियोजना में विलंब पर उन्होंने अधिकारियों से जवाब तलब किया और समयसीमा में कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया।

बस्तर की जरूरतों को समझने वाला नेतृत्व

मुंगेली जिले के ग्रामीण परिवेश से आने वाले अरुण साव स्वयं गांवों की जरूरतों और ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को करीब से समझते हैं। कृषक परिवार से जुड़े होने और वनांचल क्षेत्रों की परिस्थितियों को अनुभव करने के कारण उनकी प्राथमिकताओं में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार प्रमुख रूप से दिखाई देता है।

बस्तर दौरे के दौरान भी यही संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से देखने को मिली, जहां उन्होंने विकास कार्यों के साथ-साथ लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने का प्रयास किया।

बदलते बस्तर की नई तस्वीर

आज बस्तर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पर्यटन और आजीविका के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरीकरण भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में नगरीय निकायों की स्थिति, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, आवास योजनाएं और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान आवश्यक है।

उपमुख्यमंत्री के दौरे में इन विषयों को प्राथमिकता मिलना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

संभावनाओं का नया केंद्र बनता बस्तर

बस्तर की पहचान अब केवल संघर्ष और चुनौतियों तक सीमित नहीं रह गई है। जनजातीय संस्कृति, वन संपदा और इको-टूरिज्म इसे नई पहचान दे रहे हैं। यदि सरकारी योजनाएं स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्यमिता से प्रभावी रूप से जोड़ने में सफल होती हैं, तो बस्तर आने वाले वर्षों में समावेशी विकास और सुशासन का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव का यह दौरा इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। विकास कार्यों की निरंतर निगरानी, जनसंवाद और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने के प्रयास बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की नींव को और मजबूत करेंगे।

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